कोलकाता | 26 सितंबर 2026: पूर्व दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर भारत जैन महिला मंडल, कोलकाता शाखा के तत्वावधान में फोर्ट विलियम स्थित नेता जी बैरक, कोलकाता में सैनिकों से भेंट एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम गरिमामय और भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। देश की सुरक्षा में समर्पित वीर जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाला यह आयोजन राष्ट्रनिष्ठा, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक संवेदना का संगम बना।
कार्यक्रम में महिला मंडल की करीब 20 सदस्याओं ने सैनिकों का अभिनंदन करते हुए उनके साहस, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति सम्मान व्यक्त किया। वंदे मातरम् और राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद उपस्थित सैनिकों एवं प्रमुख अधिकारी प्रवीण जी के साथ देशभक्ति गीतों और कविताओं की प्रस्तुति दी गई।
समारोह का विशेष आकर्षण डॉ. वसुधरा मिश्र द्वारा रचित काव्य-पुस्तक “नव दुर्गा नव रूप” का सैनिकों एवं अधिकारियों को भेंट किया जाना रहा। दुर्गा के विविध रूपों के माध्यम से नारीशक्ति, आस्था और जीवन-मूल्यों को अभिव्यक्त करने वाली इस कृति ने आयोजन की सांस्कृतिक गरिमा को और बढ़ाया। पूर्व दुर्गा पूजा के अवसर पर सभी सैनिकों एवं अधिकारी को काव्य-संग्रह के साथ केसरिया रंग का दुपट्टा और मिठाई के डिब्बे भी भेंट किए गए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता चंदा गोलछा ने की, जबकि संस्था की संस्थापक अंजू सेठिया ने स्वागत भाषण दिया। समारोह में सरोज भंसाली, नेहा रामपुरिया, सुषमा छाजेड, अनु जैन बोहरा, तारिका मेहता, सुनीता कुण्डलिया, विनिता डागा, प्रांजल डागा, मनन सिंघी, सुमन सिंघी, रोमा दास, जतन श्यामसुखा, गुलाब बैगाणी, मंजु पारख, सुधा मालु तथा जय श्री भूतोडीया सहित मंडल की अन्य सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही।
समारोह का वातावरण केवल औपचारिक सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सैनिकों और समाज के बीच भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने वाला अनुभव बना। उपस्थित सदस्यों ने सैनिकों के साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
आयोजन में सेवा, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की भावना प्रमुख रूप से दिखाई दी। सैनिकों के सम्मान की यह पहल समाज में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किए जाने वाले त्याग और समर्पण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बनी।
समापन अवसर पर आयोजन की सफलता के लिए सभी सहयोगियों एवं सहभागी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। समग्र रूप से यह समारोह पूर्व दुर्गा पूजा की आध्यात्मिक चेतना को राष्ट्रसेवा और सामाजिक संवेदना से जोड़ने वाली एक भावपूर्ण पहल के रूप में संपन्न हुआ।


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