‘थका बटोही’ में दर्ज हुई जीवन यात्रा की कहानी, पिण्डारूच में विद्वानों की मौजूदगी में हुआ विमोचन
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अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति धरणीधर झा ने किया पुस्तक का लोकार्पण, लेखक रुक्मिणी कांत चौधरी के संस्मरणों पर केंद्रित रहा समारोह
पत्रकार : सीतेश चौधरी
पिण्डारूच, दरभंगा। जीवन के अनुभवों को शब्दों में पिरोकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास शुक्रवार को दरभंगा जिले के पिण्डारूच गांव में देखने को मिला। केवटी प्रखंड स्थित रतिकान्त सदन परिसर में अवकाश प्राप्त न्यायाधीश रुक्मिणी कांत चौधरी की पुस्तक ‘थका बटोही’ का विमोचन समारोह आयोजित हुआ। पटना उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति धरणीधर झा ने पुस्तक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर साहित्य और समाज से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
समारोह में पुस्तक के विषय, लेखक के जीवन अनुभव और संस्मरण साहित्य की उपयोगिता पर चर्चा हुई। आयोजन ने गांव की साहित्यिक-सांस्कृतिक पहचान को भी रेखांकित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सरपंच एवं वयोवृद्ध शिवकांत झा ने की। आकाशवाणी के प्रख्यात व्यक्तित्व मणिकांत झा भी मंच पर उपस्थित रहे।
वैदिक मंत्रोच्चार से शुरू हुआ समारोह
कार्यक्रम का शुभारंभ अवकाश प्राप्त सैनिक पंडित मणिनाथ मिश्रा के वेदोच्चारण से हुआ। वैदिक मंत्रों के साथ आरंभ हुए समारोह में परंपरा और साहित्य का सुंदर संगम दिखाई दिया।
इसके बाद फिल्म अभिनेता नवीन चौधरी ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने समारोह में शामिल अतिथियों का स्वागत किया। स्वागत संबोधन के बाद बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘थका बटोही’ का विमोचन किया गया।
पुस्तक के लोकार्पण के साथ ही उपस्थित साहित्यकारों और विद्वानों के बीच लेखक की रचनात्मक यात्रा को लेकर चर्चा का वातावरण बना। आयोजन में शामिल लोगों ने इस अवसर को साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।

अपने जीवन के कई पहलुओं को लेखक ने किया शब्दबद्ध
पुस्तक विमोचन के बाद लेखक रुक्मिणी कांत चौधरी ने अपनी रचना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि ‘थका बटोही’ उनकी जीवन यात्रा के संस्मरणों पर आधारित है। इसमें उनके व्यक्तिगत जीवन के अलग-अलग पहलुओं को शामिल किया गया है।
लेखक के संबोधन से पुस्तक की मूल विषयवस्तु सामने आई। यह रचना उनके जीवन में आए विभिन्न अनुभवों और यात्रा के अनेक पड़ावों को पाठकों के सामने रखने का प्रयास है।
संस्मरण साहित्य की विशेषता यह होती है कि इसके माध्यम से पाठक लेखक के अनुभवों, विचारों और जीवन से जुड़े प्रसंगों को निकटता से समझ पाते हैं। ‘थका बटोही’ भी लेखक की अपनी यात्रा को अभिव्यक्ति देने वाली कृति के रूप में प्रस्तुत हुई।
धरणीधर झा ने लेखक से अपने आत्मीय संबंधों का किया उल्लेख
समारोह के मुख्य अतिथि अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति धरणीधर झा ने लेखक रुक्मिणी कांत चौधरी के साथ अपने संबंधों का उल्लेख करते हुए भावपूर्ण विचार रखे।
उन्होंने कहा कि वे श्री चौधरी को अपना ज्येष्ठ भ्राता मानते हैं और उनसे उन्हें हमेशा अपार स्नेह मिलता रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पिण्डारूच आने की उनकी दिली इच्छा थी।
पुस्तक विमोचन के अवसर पर गांव पहुंचने और विद्वानों की इस भूमि पर उपस्थित होने पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की। उनके संबोधन में लेखक के प्रति सम्मान के साथ-साथ पिण्डारूच के प्रति आत्मीय भाव भी दिखाई दिया।
धरणीधर झा के वक्तव्य ने समारोह को व्यक्तिगत संबंधों की गर्माहट से भी जोड़ा। पुस्तक के लोकार्पण का अवसर उनके लिए केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांव आने की लंबे समय से रही इच्छा पूरी होने का अवसर भी बना।

शिवकांत झा ने जीवन यात्रा को बताया अनुकरणीय
समारोह की अध्यक्षता कर रहे पूर्व सरपंच शिवकांत झा ने लेखक के जीवन अनुभवों की सराहना की। उन्होंने रुक्मिणी कांत चौधरी की जीवन यात्रा को प्रेरणादायक बताते हुए पुस्तक के महत्व पर अपने विचार रखे।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि पुस्तक का प्रत्येक शब्द पाठकों को कुछ न कुछ सीखने और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देगा।
उनके अनुसार, जीवन में अर्जित अनुभवों को लेखन के माध्यम से समाज के सामने रखना महत्वपूर्ण है। इससे पाठकों को दूसरे व्यक्ति की यात्रा को समझने और उससे प्रेरणा लेने का अवसर मिलता है।
शिवकांत झा के संबोधन ने पुस्तक को केवल लेखक के व्यक्तिगत संस्मरणों तक सीमित न मानकर उससे मिलने वाली संभावित प्रेरणा की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।
विद्वानों की मौजूदगी ने बढ़ाई समारोह की गरिमा
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य विद्वानों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। साहित्य और सामाजिक जीवन से जुड़े लोगों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया।
पिण्डारूच में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय स्तर पर साहित्यिक संवाद का अवसर बना। पुस्तक विमोचन जैसे आयोजन लेखक की रचना को पाठकों तक पहुंचाने के साथ-साथ विचारों के आदान-प्रदान का भी माध्यम बनते हैं।
समारोह में स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों के अलावा मीडियाकर्मी भी उपस्थित रहे। उनकी मौजूदगी से आयोजन की जानकारी व्यापक स्तर पर पहुंचाने का अवसर मिला।

मणिकांत चौधरी ने किया मंच संचालन, ललित चौधरी ने जताया आभार
समारोह की पूरी कार्यवाही को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मणिकांत चौधरी ने संभाली। उन्होंने मंच संचालन करते हुए कार्यक्रम के विभिन्न चरणों का संयोजन किया।
अंत में ललित चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल अतिथियों, विद्वानों और अन्य उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस आयोजन की आयोजक लेखक रुक्मिणी कांत चौधरी की दौहित्रीद्वय स्वाती एवं स्वेता थीं। वहीं, आयोजन की जिम्मेदारी ज्ञानेश चौधरी ने संभाली।
संस्मरण साहित्य के माध्यम से पाठकों तक पहुंचेगी जीवन यात्रा
‘थका बटोही’ के विमोचन के साथ रुक्मिणी कांत चौधरी की जीवन यात्रा से जुड़े अनुभवों को पुस्तक के रूप में पाठकों तक पहुंचाने का अवसर सामने आया। समारोह में वक्ताओं ने लेखक के जीवन, उनके अनुभवों और पुस्तक से मिलने वाली प्रेरणा पर अपने विचार रखे।
पिण्डारूच के रतिकान्त सदन परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम साहित्य के प्रति सम्मान और व्यक्तिगत अनुभवों को सहेजने की परंपरा का उदाहरण बना। विद्वानों की उपस्थिति और वक्ताओं के विचारों के बीच पुस्तक का लोकार्पण संपन्न हुआ।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों के लिए ‘थका बटोही’ केवल एक पुस्तक का नाम नहीं, बल्कि लेखक की जीवन यात्रा को जानने का माध्यम भी बना। समारोह ने यह रेखांकित किया कि जीवन के अनुभवों को लेखन में संजोकर समाज के साथ साझा करना साहित्य की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।



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