कथा पाठ से जीवंत हुआ महोत्सव
छठे दिन उमड़ा सांस्कृतिक उत्साह
दरभंगा में आकाशवाणी के निकट स्थित बहुद्देशीय भवन में अष्टदल महोत्सव के छठे दिन कथा पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और कला के प्रति रुचि रखने वाले लोग पहुंचे। पूरा परिसर सांस्कृतिक रंग में डूबा नजर आया।
अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता नारायण चौधरी उपस्थित रहे। साथ ही आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिशासी मितेश मिश्रा भी मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर वेद प्रकाश, प्रकाश बंधु और श्याम भास्कर सहित कई कलाकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
शुभारंभ और सम्मान समारोह
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। अतिथियों का सम्मान किया गया। इसके बाद कथा पाठ की श्रृंखला प्रारंभ हुई।
कथाओं ने बांधा समा
कथा पाठ के दौरान अलग-अलग विषयों पर रचनाएं प्रस्तुत की गईं।
- कमलेंद्र चक्रपाणि ने अपनी रचनाएं सुनाईं
- श्राद्ध
- डोम
- स्नेह
- आशुतोष मिश्रा ने मैथिली कथा “राम भऽ जेनाइ” का प्रभावशाली पाठ किया
श्रोताओं ने तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
सम्मान के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी रचनाकारों और कलाकारों को स्मृति चिह्न और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया। आयोजन समिति ने सभी प्रतिभागियों के प्रयास की सराहना की।
आने वाले कार्यक्रमों की झलक
महोत्सव के संयोजक सागर सिंह ने बताया कि यह आयोजन आठ दिनों तक चलेगा। विश्व रंगमंच दिवस से शुरू हुआ यह महोत्सव हिंदी रंगमंच दिवस तक जारी रहेगा।
आगामी प्रस्तुतियां:
| दिन | समय | कार्यक्रम |
|---|---|---|
| गुरुवार | शाम 06:00 बजे | गोनू झा का मंचन |
| अंतिम दिन | निर्धारित समय | गज फुट इंच नाटक |
अंतिम दिन की प्रस्तुति बिहार सरकार से सम्मानित निर्देशक रोशन कुमार के निर्देशन में होगी।
देशभर के कलाकारों की भागीदारी
इस आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से कलाकार दरभंगा पहुंचे हैं। यह महोत्सव स्थानीय कला और रंगमंच को नई पहचान दे रहा है।
युवा टीम ने संभाली जिम्मेदारी
कार्यक्रम के सफल संचालन में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
- अमन सिंह
- नेहा कुमारी
- हर्षित कुमार
- आर्यन
- विशाल
- किसुन
- संध्या
- नीलेश
- साहिल
शहरवासियों की बढ़ी भागीदारी
कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिक, मीडियाकर्मी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। सभी ने आयोजन की सराहना की।
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