कोलकाता, 6 मार्च: भारत में पहली बार विश्व प्रसिद्ध St. Gallen International Breast Cancer Conference का आयोजन कोलकाता में किया गया। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की मेजबानी Institute of Breast Diseases Kolkata (IBDK) ने की, जिसमें देश-विदेश के प्रमुख ऑन्कोलॉजिस्ट, शोधकर्ता और चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया। यह सम्मेलन Taj Taal Kutir में आयोजित किया गया और इसमें 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
दुनिया के सबसे प्रभावशाली स्तन कैंसर मंचों में से एक माने जाने वाले इस सम्मेलन में वैश्विक विशेषज्ञ नवीनतम वैज्ञानिक शोध, उपचार पद्धतियों और भविष्य की चिकित्सा दिशाओं पर चर्चा करते हैं। यहां बनने वाली सहमति सिफारिशें दुनिया भर में स्तन कैंसर उपचार के दिशा-निर्देशों को प्रभावित करती हैं।
भारत में बढ़ते स्तन कैंसर मामलों पर चिंता
सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत एक हालिया अध्ययन में बताया गया कि भारत में स्तन कैंसर के मामलों में पिछले तीन दशकों में तेज़ वृद्धि हुई है। 1990 में प्रति एक लाख महिलाओं में जहां 13 मामले दर्ज होते थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 29.4 प्रति लाख हो गई है। यह आंकड़ा देश में कैंसर जागरूकता, शुरुआती जांच और बेहतर उपचार सुविधाओं की आवश्यकता को दर्शाता है।
वैश्विक विशेषज्ञों की भागीदारी
इस सम्मेलन में 10 से अधिक अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी, 200 से अधिक राष्ट्रीय विशेषज्ञ और 500 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
स्विट्जरलैंड के प्रसिद्ध विशेषज्ञ Beat Thürlimann ने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति का लाभ दुनिया भर के मरीजों तक पहुंचना चाहिए और ऐसे मंच वैश्विक विशेषज्ञों और चिकित्सकों के बीच सहयोग को मजबूत करते हैं।
फ्रांस के ऑन्कोलॉजिस्ट Etienne Brain ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए अत्यंत आवश्यक है। वहीं स्विट्जरलैंड के Jens Hübner ने कहा कि स्तन कैंसर के उपचार में सर्जरी, रेडिएशन और दवाओं के समन्वित उपचार की महत्वपूर्ण भूमिका है।
‘प्रोजेक्ट पिंक आर्मी’ की शुरुआत
सम्मेलन के दौरान एक महत्वपूर्ण पहल Project Pink Army की भी शुरुआत की गई। यह एक सामुदायिक स्वयंसेवी अभियान है जिसका उद्देश्य समाज में कैंसर जागरूकता फैलाना और मरीजों को सहयोग प्रदान करना है।
यह पहल IBDK की पूर्व परियोजना Project Pink Alert से प्रेरित है, जिसके अंतर्गत छात्रों के लिए आयोजित ऑनलाइन कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में 1.8 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया था और इसे Guinness World Records में भी दर्ज किया गया।
युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन
सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण 100 से अधिक वैज्ञानिक शोध-सार (abstracts) और 30 से अधिक शोध प्रस्तावों की प्रस्तुति रहा। प्रतिस्पर्धी अनुदान कार्यक्रम के तहत कई शोध परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की गई।
इसके अलावा पांच युवा शोधकर्ताओं को चयनित किया गया, जिन्हें वर्ष 2027 में वियना में होने वाले St. Gallen International Breast Cancer Conference में अपने शोध प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
एशियाई कैंसर कंसेंसस मीट
सम्मेलन के दौरान Asian Cancer Consensus Meet भी आयोजित की गई, जिसमें एशिया क्षेत्र में कैंसर उपचार से जुड़ी चुनौतियों और क्लीनिकल प्रश्नों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। इस बैठक के निष्कर्ष एक प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किए जाने की संभावना है।
उपचार की पहुंच सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कई देशों में कैंसर उपचार तक पहुंच अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आर्थिक बाधाएं, भौगोलिक दूरी और स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे की कमी के कारण कई मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
Soumen Das, निदेशक, Institute of Breast Diseases Kolkata ने कहा कि इस सम्मेलन को कोलकाता में आयोजित करने से भारतीय चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका मजबूत करने का अवसर मिला है।
वहीं Tanmoy Kumar Mandal, निदेशक IBDK ने कहा कि यह पहल केवल अकादमिक चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शोध को प्रोत्साहन, युवा वैज्ञानिकों को समर्थन और क्षेत्रीय स्तर पर कैंसर उपचार की पहुंच बढ़ाने के प्रयास भी शामिल हैं।
कोलकाता बन रहा वैश्विक कैंसर शोध का केंद्र
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी, शोध सहयोग और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से यह सम्मेलन कोलकाता को वैश्विक कैंसर शोध और विचार-विमर्श के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Institute of Breast Diseases Kolkata की स्थापना वर्ष 2020 में स्तन कैंसर के बेहतर उपचार, प्रारंभिक जांच, चिकित्सा प्रशिक्षण और सभी मरीजों तक उपचार की समान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी।
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