कोलकाता | २४ फरवरी, २०२६
माहेश्वरी इंटरनेशनल बिजनेस फाउंडेशन (MIBF) ने सोमवार को कोलकाता के वित्तीय परिदृश्य में एक नई ऊर्जा का संचार करते हुए एक उच्चस्तरीय निवेशक सम्मेलन (Investor Summit) का सफल आयोजन किया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण (Long-term Wealth Creation), अनुशासित निवेश और निवेश के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की उभरती भूमिका पर प्रकाश डालना था। कार्यक्रम में शहर के गणमान्य उद्यमियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और वित्तीय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
नेतृत्व और प्रतिष्ठित पैनल
सत्र की अध्यक्षता एमआईबीएफ की अध्यक्ष ममता बिनानी और फाउंडेशन के संस्थापक एवं महासचिव संतोष कुमार लाहोटी ने की। चर्चा को गहराई देने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था:
विमल परवाल: मुंबई से आए चॉइस कैपिटल एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के एसोसिएट डायरेक्टर, जिन्होंने आधुनिक पूंजी बाजार की बारीकियों को साझा किया।
बसंत बाहेती: इंदौर के 39 वर्षों के अनुभव वाले दिग्गज निवेशक, जिन्होंने बाजार के उतार-चढ़ाव और निवेश मनोविज्ञान पर अपने अनुभव साझा किए।
संचालन: सीए विकास जैन (पूर्व अध्यक्ष ईआईआरसी आईसीएआई एवं संस्थापक निदेशक, मेरफिन एडवाइजर्स) ने सत्र का कुशल संचालन किया और चर्चा को सार्थक दिशा दी।
निवेश के बदलते आयाम: सट्टेबाजी बनाम अनुशासन
सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सफल निवेश का आधार 'अल्पकालिक सट्टा' नहीं बल्कि 'धैर्य' है। विशेषज्ञों ने इक्विटी, म्यूचुअल फंड, सोना और चांदी जैसे विविध क्षेत्रों में निवेश करने की सलाह दी।
वरिष्ठ निवेशक बसंत बाहेती ने अपने दशकों के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि कैसे निरंतरता और विश्वसनीय संस्थानों पर भरोसा रखने से संपत्ति कई गुना बढ़ती है। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि वे बाजार के शोर (Market Noise) से बचकर सूचित निर्णय (Informed Decisions) लें।
एआई (AI): निवेश का भविष्य
इस सम्मेलन की एक बड़ी विशेषता निवेश क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग पर विस्तृत चर्चा रही। विशेषज्ञों ने बताया कि एआई न केवल निवेश विश्लेषण और जोखिम आकलन में मदद कर रहा है, बल्कि यह व्यक्तिगत पोर्टफोलियो प्रबंधन को भी सटीक बना रहा है। आने वाले समय में तकनीक से लैस निवेशक ही बाजार में बेहतर बढ़त हासिल कर पाएंगे।
नेतृत्व के विचार
सुश्री ममता बिनानी ने अपने संबोधन में कहा, “भारत वर्तमान में एक ऐसी विकास गाथा लिख रहा है जहाँ तकनीक और पारदर्शिता का मेल हो रहा है। एमआईबीएफ का प्रयास है कि हम निवेशकों को वह मंच और ज्ञान प्रदान करें जिससे वे दीर्घकालिक मूल्य सृजन (Value Creation) कर सकें।”
वहीं, संतोष कुमार लाहोटी ने भारतीय आर्थिक तंत्र की परिपक्वता पर जोर देते हुए कहा, “भारत की विकास दर निवेशकों के लिए स्वर्ण अवसर लेकर आई है। लेकिन स्थायी संपत्ति बनाने के लिए केवल पैसा नहीं, बल्कि अनुशासन और एक ठोस रणनीति की आवश्यकता होती है।”
निष्कर्ष: वित्तीय संवाद का नया केंद्र
यह आयोजन न केवल एक बैठक थी, बल्कि इसने कोलकाता को रणनीतिक पूंजी भागीदारी और वित्तीय संवाद के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया। एमआईबीएफ ने इस सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट किया कि शिक्षा, तकनीक और धैर्य ही सफल निवेश के तीन मुख्य स्तंभ हैं।
इस लेख के लिए मुख्य बातें (Highlights):
अनुशासित निवेश: सट्टेबाजी के बजाय पोर्टफोलियो विविधीकरण पर जोर।
तकनीकी समावेश: निवेश में एआई आधारित टूल्स के महत्व पर चर्चा।
विशेषज्ञ मार्गदर्शन: मुंबई और इंदौर के विशेषज्ञों द्वारा व्यक्तिगत अनुभव साझा करना।
0 Comments