खादी कताई प्रशिक्षण पूरा करने वाली महिलाओं को मिला सम्मान, पिण्डारूच को नई पहचान दिलाने का संकल्प
दरभंगा के पिण्डारूच में प्रमाण पत्र वितरण समारोह आयोजित, वक्ताओं ने चरखा और ग्रामोद्योग को ग्रामीण विकास का आधार बताया
दरभंगा। केवटी प्रखंड के पिण्डारूच गांव में खादी कताई की परंपरा को आगे बढ़ाने और ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक हुनर से जोड़ने की पहल को नई गति मिली। अनादि फाउंडेशन के तत्वावधान में संचालित अनादि खादी एवं ग्रामोद्योग संस्थान में शनिवार को खादी कताई प्रशिक्षण पूरा करने वाली महिलाओं के बीच प्रमाण पत्र वितरित किए गए। दस अक्टूबर को आयोजित इस समारोह में खादी के महत्व, ग्रामीण स्वावलंबन और महिलाओं की भागीदारी पर विस्तार से चर्चा हुई।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, पटना के डॉ. राजेन्द्र प्रसाद बहुद्देशीय प्रशिक्षण केंद्र की ओर से आयोजित किया गया था। इसमें एक अगस्त से 30 अगस्त तक चले पुनश्चर्या प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल महिलाओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। प्रमाण पत्र मिलने पर प्रशिक्षणार्थियों ने प्रसन्नता व्यक्त की। उनके लिए यह सम्मान कताई का कौशल सीखने के साथ अपनी रुचि को साकार करने का अवसर भी था।

मिथिला की परंपरा के साथ अतिथियों का स्वागत
समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि अशोक सिन्हा के सम्मान से हुई। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर श्रीश चंद्र चौधरी ने उन्हें मिथिला चित्रकला से सुसज्जित पाग-दुपट्टा और रंगशिल्पी उपहार भेंट किया।
इसके बाद गांव के वयोवृद्ध शिवकांत झा, अवकाश प्राप्त शिक्षक ललन जी चौधरी और संस्थान की महिला सदस्य ममता राय ने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के अधिकारी प्रवीण सरिता, प्रशिक्षक महेश प्रसाद तथा डॉ. पूजा कुमारी को उपहार देकर सम्मानित किया।

जयप्रकाश नारायण की स्मृति में आयोजित हुआ कार्यक्रम
मुख्य अतिथि अशोक सिन्हा ने अपने संबोधन में जयप्रकाश नारायण के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि दस अक्टूबर को जयप्रकाश नारायण ने ग्राम निर्माण मंडल की स्थापना की थी। ऐसे दिन खादी प्रशिक्षणार्थियों को सम्मानित करना उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक माध्यम है।
कार्यक्रम में शिवकांत झा ने चरखा चलाने की परंपरा को निरंतर बनाए रखने का संदेश दिया। उनका आह्वान था, “चरखा चालू रहे।” उपस्थित लोगों ने तालियों के साथ इस विचार का समर्थन किया। वक्ताओं ने कहा कि चरखा केवल कताई का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण कौशल और पारंपरिक श्रम से जुड़ी विरासत का प्रतीक भी है।

संस्थान ने पूरा किया महिलाओं का सपना
संस्थान की सदस्या विनीता मिश्रा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आसपास की बुजुर्ग महिलाओं को चरखा चलाते देखकर उनके मन में भी इसे सीखने की इच्छा जागती थी। हालांकि, प्रशिक्षण की सुविधा नहीं होने के कारण वह अपनी इस इच्छा को पूरा नहीं कर पा रही थीं।
उन्होंने कहा कि संस्थान के माध्यम से उन्हें चरखा चलाना सीखने का अवसर मिला। इस तरह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधा ने उनकी पुरानी आकांक्षा को पूरा करने में मदद की।

पूरे देश में पिण्डारूच को खादी से पहचान दिलाने का लक्ष्य
संस्थान के संचालक प्रो. प्रदीप कांत चौधरी ने कहा कि बिहार में खादी से संबंधित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में उनका संस्थान विशेष भूमिका निभा रहा है। उन्होंने अपना लक्ष्य स्पष्ट करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि देशभर में पिण्डारूच गांव की पहचान खादी के कारण हो।
कार्यक्रम में भोगेन्द्र महतो, श्रीश चंद्र चौधरी, ललन जी चौधरी, विनता मिश्रा और ममता ठाकुर ने भी महिलाओं का मार्गदर्शन किया। वक्ताओं ने खादी कताई के प्रशिक्षण को ग्रामीण महिलाओं के कौशल विकास से जोड़ते हुए इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
समारोह के अंत में संस्थान की कोषाध्यक्ष डॉ. पूजा कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मंच संचालन प्रो. प्रदीप कांत चौधरी ने किया। कार्यक्रम में स्थानीय गणमान्य लोगों, ग्रामीणों और समाचार माध्यमों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।
पिण्डारूच में आयोजित इस कार्यक्रम ने खादी कताई के पारंपरिक कौशल को आगे बढ़ाने, महिलाओं को प्रशिक्षण से जोड़ने और गांव को खादी के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान दिलाने के संस्थान के प्रयासों को रेखांकित किया। प्रमाण पत्र वितरण के साथ प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं को अपने हुनर का उपयोग जारी रखने के लिए प्रोत्साहन मिला।



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