कोलकाता:
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर प्रतिवर्ष देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु गंगासागर तीर्थ के लिए प्रस्थान करते हैं। इस महान जनसेवा से प्रेरित होकर संस्थापक नंद किशोर जायसवाल ने वर्ष 2002 ईस्वी में प्रान्तीयता जायसवाल समाज की स्थापना कर कोलकाता के बाबूघाट, इडेन गार्डेन गेट संख्या-1 के समीप शिविर संख्या-17 में गंगासागर तीर्थयात्री सेवा शिविर (दूधवाला शिविर) की शुरुआत की थी।
इस सेवा अभियान को आगे बढ़ाने में रूपा फाउंडेशन के चेयरमैन कुंज बिहारी अग्रवाल, दिनेश जैन गंगवाल, संजय गुप्ता, रामनरेश जायसवाल, कोषाध्यक्ष रामचंद्र गुप्ता, फूलकुमारी जायसवाल, अध्यक्ष कंचन जायसवाल, सचिव दीपा गुप्ता, कोषाध्यक्ष प्रियंका सिंह, कोमल, रिंकु साव, संतोष साव, सुदामा प्रसाद जायसवाल, शम्भूनाथ जायसवाल, अवधेश साव, ताड़कनाथ जायसवाल सहित अनेक कर्मठ कार्यकर्ताओं का निरंतर सहयोग रहा।
बाबूघाट स्थित यह सेवा शिविर मेला अवधि में मिनी भारत का रूप ले लेता है, जहाँ देश के विभिन्न राज्यों से आए तीर्थयात्री सेवा का लाभ उठाते हैं। शिविर में 24 घंटे गर्मागर्म केसरयुक्त दूध, इमरती, गुलाब जामुन एवं नाश्ते की निःशुल्क व्यवस्था की जाती है। इसके साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए एलोपैथिक चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध रहती है।
इस वर्ष गंगासागर मेला अवसर पर यह सेवा शिविर 9 जनवरी 2026 को प्रारंभ हुआ और 16 जनवरी 2026 तक संचालित रहा। सेवा के इस महायज्ञ के अंतर्गत नंद किशोर जायसवाल ने एक जरूरतमंद जोड़े का विवाह भी संपन्न करवाया, जो समाजसेवा का अनुकरणीय उदाहरण बना।
आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष लगभग 1 लाख 22 हजार तीर्थयात्रियों ने शिविर में भोजन ग्रहण किया, जबकि करीब 10 हजार श्रद्धालुओं का मेडिकल चेक-अप किया गया। इस सेवा कार्य में जायसवाल समाज की महिला समिति की भी सक्रिय सहभागिता रही।
गंगासागर तीर्थयात्री सेवा शिविर निःस्वार्थ सेवा, सामाजिक एकता और मानवता की मिसाल बन चुका है, जो हर वर्ष श्रद्धालुओं के लिए सहारा बनता है।
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